vikram9
गुरुवार, 27 दिसंबर 2007
मेरे.....................
मेरे आसुओ मे देखो क्या, सब्रे आशिकी है
मचले हैं क्याँ सभल कर,पलकें भी नम नहीं हैं
vikram
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
नई पोस्ट
पुरानी पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
ब्लॉग आर्काइव
►
2008
(6)
►
फ़रवरी
(1)
►
जनवरी
(5)
▼
2007
(13)
▼
दिसंबर
(13)
साथी अब न रहा जाता है
आज...................
ओ मधुमास........................
अर्थ हीन
मेरे.....................
ओ महाशून्य...............
होती हैं जब भी...........
रोती रजनी ...........
आज रात...............
सुनो तन्हाई मेंअधरों पर अधर की छुवनगर्म सासों की त...
कोई टाइटल नहीं
मानव.......
सच नही कोई परिंदा, जाल मे फँस जाएगा कर हलाले-पाक उ...
मेरे बारे में
singh
केशवाही,जि.शह्डोल, मध्य प्रदेश, India
मेरा पूरा प्रोफ़ाइल देखें
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें